बक्सर, 14 जुलाई (विक्रांत) जिले में धान रोपाई की बेहद धीमी रफ्तार पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जिला पदाधिकारी श्रीमती साहिला की अध्यक्षता में आयोजित कृषि टास्क फोर्स की बैठक में कृषि एवं सिंचाई व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान जिले में धान की मात्र 8 प्रतिशत रोपाई होने और 325 राजकीय नलकूपों में केवल 113 के चालू रहने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने लघु सिंचाई प्रमंडल, बक्सर को निर्देश दिया कि चार से पांच दिनों के भीतर सभी 212 बंद नलकूपों को हर हाल में चालू किया जाए।

जिला पदाधिकारी ने सोन नहर प्रमंडल, बक्सर, चौसा एवं विक्रमगंज तथा गंगा पंप नहर, चौसा के अधिकारियों को भी सख्त निर्देश देते हुए कहा कि धान रोपाई के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए और नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी किसान को सिंचाई के अभाव का सामना न करना पड़े। बैठक में संभावित सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए जिला कृषि पदाधिकारी को पहले से ही वैकल्पिक खेती की तैयारी करने का निर्देश दिया गया।

वहीं सहायक निदेशक (रसायन), मिट्टी जांच प्रयोगशाला को किसानों द्वारा दिए गए मिट्टी के नमूनों की शीघ्र जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने को कहा गया।उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान डीएम ने टमाटर और पपीता की सामूहिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों को एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) से जोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में टमाटर सॉस, सूप, टमाटर प्यूरी, पपीता पाउडर, जैम, जेली और पपेन जैसे मूल्य संवर्धित उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर कार्य करने को कहा।

मत्स्य विभाग की समीक्षा में प्रत्येक प्रखंड में एक-एक बायोफ्लॉक इकाई स्थापित करने के लिए किसानों का चयन करने का निर्देश दिया गया। वहीं सहायक निदेशक, भूमि संरक्षण को सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए चेक डैम निर्माण की दिशा में तेजी से कार्य करने का आदेश दिया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसानों की हर समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर कृषि उत्पादन को गति देना सर्वोच्च प्राथमिकता है।


















