नई दिल्ली, 17 जून (अशोक “अश्क”) अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर दुनिया भर की निगाहें स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच शुक्रवार को महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि यह डील सफल होती है तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, हवाई यात्रा और यहां तक कि बैंक लोन की ईएमआई तक में राहत मिलने की संभावना है।प्रस्तावित समझौते के मसौदे में पांच प्रमुख बिंदु शामिल हैं। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना, युद्धविराम की अवधि 60 दिन और बढ़ाना, ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत, परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू करना और दीर्घकालिक समाधान की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। हाल के तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है और ईरानी तेल की वापसी होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है।तेल सस्ता होने का सबसे बड़ा फायदा वाहन चालकों को मिल सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा। साथ ही माल ढुलाई की लागत घटने से सब्जियों, फलों, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी राहत मिल सकती है। हवाई यात्रियों के लिए भी यह खबर राहतभरी हो सकती है।

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की लागत कम होने पर एयरलाइंस कंपनियां किराए में कटौती कर सकती हैं या अधिक छूट दे सकती हैं। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी आने से महंगाई दर पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। महंगाई नियंत्रित रहने पर भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरें कम रखने या भविष्य में कटौती करने की अधिक गुंजाइश मिल सकती है। ऐसे में होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई में भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर साबित हो सकता है।
















