बक्सर, 24 जुलाई (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में वैज्ञानिक शोध और प्रकाशन की गुणवत्ता को नई दिशा देने के उद्देश्य से कृषि प्रसार शिक्षा विभाग एवं कृषि अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “प्रभावी वैज्ञानिक लेखन एवं शोध प्रकाशन रणनीतियाँ” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन हुआ। 22 से 24 जुलाई तक चली इस कार्यशाला में स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों को वैज्ञानिक लेखन, शोध संप्रेषण और प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन बिहार कृषि महाविद्यालय की एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. रूबी रानी ने किया। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की वास्तविक सफलता तभी मानी जाती है, जब उसे प्रभावी वैज्ञानिक लेखन के माध्यम से प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाए।

कॉलेज ऑफ एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट (सीएबीएम) के एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. एम. के. वाधवानी ने भी विद्यार्थियों को वैज्ञानिक लेखन एवं शोध प्रकाशन कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में विश्वविद्यालय के 12 विभागों से कुल 55 स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को वैज्ञानिक लेखन की मूलभूत अवधारणाओं, शोध पत्र की संरचना (आईएमआरएडी), साहित्य समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन, शोध नैतिकता, प्रभावी सार एवं भूमिका लेखन, कार्यविधि, परिणाम, निष्कर्ष, शोध पत्रिका चयन, पांडुलिपि प्रस्तुतिकरण, शोध प्रस्ताव, तकनीकी रिपोर्ट, नीति संक्षेप, मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतीकरण, वैज्ञानिक संपादन तथा प्रूफरीडिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला के विशेष आकर्षण के रूप में आईसीएआर–केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), हिसार की वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. ऐश्वर्या एस. ने उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र तैयार करने और उच्च प्रभाव कारक वाली अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संपादकों और समीक्षकों की अपेक्षाओं के अनुरूप शोध पत्र तैयार करने के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से खुलकर संवाद किया और सभी तकनीकी सत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों ने इसे शोध लेखन और प्रकाशन की प्रक्रिया को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आदित्य सिन्हा के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि डॉ. प्रीति प्रियदर्शनी, डॉ. नेहा पाण्डेय तथा कृषि प्रसार शिक्षा विभाग की आयोजन समिति ने इसके सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।















