मुजफ्फरपुर, 02 नवम्बर (संतोष गुप्ता) वुशू के खेल में महारत हासिल कर ईशा एवं अपराजिता मिश्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं। हरिसभा चौक निवासी गुरु दिनेश मिश्रा की बेटियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा के दम पर खेल जगत में अलग पहचान बनाई है। छोटी बेटी अपराजिता मिश्रा ने जार्जिया में आयोजित बाटुमी ओपन इंटरनेशनल वुशू प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया है। अपराजिता ने बीते वर्ष आयोजित नेशनल गेम्स में राज्य के लिए पदक का खाता खोला था। इससे पहले भी वह एक दर्जन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जिले के लिए पदक जीत चुकी हैं। वहीं, बड़ी बहन ईशा मिश्रा राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं और दो दर्जन से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं।

करीब तीन दशक पहले गुरु दिनेश मिश्रा ने वुशू की जिस परंपरा की शुरुआत की थी, उनके निधन के बाद बेटियां उसे आगे बढ़ा रही हैं। बचपन से ही दोनों बहनें इस खेल के प्रति समर्पित रही हैं। पिता का अनुशासन और खेल के प्रति जुनून उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना।ईशा मिश्रा ने वर्ष 2007 में सब-जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपने सफर की शुरुआत की थी। पिता उनके पहले कोच और प्रेरणास्रोत थे। नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा प्राप्त ईशा एनआईएस कोच भी हैं। वह 20 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। छोटी बहन अपराजिता भी दो अंतरराष्ट्रीय पदकों सहित दो दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी हैं। बिहार सरकार दोनों बहनों को सम्मानित कर चुकी है।

पिता के निधन के बाद मां सुमन मिश्रा बेटियों को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। एमएसकेबी कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. जयश्री, बीआरएबीयू की एनएसएस समन्वयक डॉ. अनुराधा पाठक और समाजसेवी डॉ. मोनालिसा राय ने बेटियों की उपलब्धियों को समाज और राष्ट्र के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों का सम्मान, शिक्षा और सशक्तीकरण ही परिवार एवं देश की प्रगति का आधार है।
















