समस्तीपुर, 04 नवंबर (मोहम्मद जमशेद) भारतीय लोकसंस्कृति, परंपरा और समृद्ध कलात्मक विरासत का अनूठा संगम बुधवार को स्वायत्त एवं नैक बी++ ग्रेड प्राप्त संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, वीरसिंहपुर में देखने को मिला। कॉलेज की सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय ‘भारतीय सांस्कृतिक महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। झिझिया, जट-जटिन, लोकनृत्य और छठ पर्व की प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए महोत्सव का उद्देश्य भावी शिक्षकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ना तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम की शुरुआत संगीत के सहायक प्राध्यापक रोहित कुमार की गणेश वंदना से हुई।

सांस्कृतिक समिति की समन्वयक डॉ. प्रतिभा राय ने स्वागत संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन प्रशिक्षुओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और लोकपरंपराओं के महत्व को समझने का अवसर देते हैं। बीएड प्रशिक्षु अभिषेक कुमार ने मंच संचालन किया। महोत्सव के पहले दिन प्रशिक्षुओं की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रीति कुमारी, अर्पिता, शैलवी, खुशबू, खुशी और अंजलि की सामूहिक नृत्य प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। अस्मिता ने झूमर नृत्य के जरिए लोकसंस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की। मनीष कुमार ने गायन प्रस्तुत किया, जबकि मणिकांत के ‘ओ साथी रे’ गीत पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। चांदनी, आकाश सहित अन्य प्रशिक्षुओं ने भी अपनी प्रतिभा से समारोह में चार चांद लगा दिए।

इन प्रस्तुतियों को सफल बनाने में सहायक प्राध्यापक नरेन्द्र कुमार और रोहित कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दोनों ने प्रशिक्षुओं को कई दिनों तक नियमित अभ्यास कराया। समापन अवसर पर प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने कहा कि लोककलाएं भारतीय समाज की पहचान और परंपरागत विरासत की संवाहक हैं। शिक्षक-शिक्षा में सांस्कृतिक गतिविधियां प्रशिक्षुओं में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता बढ़ाती हैं। उन्होंने भावी शिक्षकों से लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

















