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बिहार के ग्रामीण विकास की पूरी यात्रा अब पुस्तक में, मुजफ्फरपुर में डॉ. विजय कुमार गुप्ता की शोधपरक कृति का भव्य विमोचन

समस्तीपुर, 04 नवंबर (मोहम्मद जमशेद) बिहार के ग्रामीण विकास की ऐतिहासिक यात्रा, उपलब्धियों और चुनौतियों को समेटने वाली महत्वपूर्ण पुस्तक का बुधवार को मुजफ्फरपुर में विमोचन किया गया। इंडियन इकनॉमिक एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन एवं 109वें वार्षिक सम्मेलन से पूर्व आयोजित कार्यक्रम में अर्थशास्त्र के राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विद्वानों की मौजूदगी में डॉ. विजय कुमार गुप्ता की पुस्तक “बिहार में ग्रामीण विकास: स्वतंत्रता से डिजिटल युग तक की यात्रा” का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एवं इंडियन इकनॉमिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने किया। अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग के प्रोफेसर प्रवीण झा ने की। इस अवसर पर डॉ. तम्मा कोटि रेड्डी, प्रो. अश्विनी महाजन सहित अर्थशास्त्र और आर्थिक चिंतन से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।ग्रामीण बिहार के बदलावों का शोधपरक दस्तावेजविमोचित पुस्तक में स्वतंत्रता के बाद से बिहार के ग्रामीण समाज और अर्थव्यवस्था में आए बदलावों का व्यापक एवं शोधपरक विश्लेषण किया गया है। इसमें कृषि विकास, भूमि सुधार, ग्रामीण रोजगार, पंचायती राज संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल शासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

पुस्तक ग्रामीण बिहार की विकास यात्रा को ऐतिहासिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हुए उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालती है। यह शोधार्थियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं और ग्रामीण विकास से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी संदर्भ साबित हो सकती है। समस्तीपुर के शिक्षक की राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धिपुस्तक के लेखक डॉ. विजय कुमार गुप्ता वीमेंस कॉलेज, समस्तीपुर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के अर्थशास्त्र विभाग में वरीय सहायक प्राध्यापक हैं। उनका शोध कार्य ग्रामीण विकास, भारतीय अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास पर केंद्रित रहा है।

देश के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों की उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन लेखक के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह कृति बिहार के ग्रामीण विकास की समझ को नई दिशा देने के साथ भविष्य की नीतियों और शोध के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करती है।

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