नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर गुरुवार को उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि जो इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके बयान के बाद सदन में सियासी हलचल तेज हो गई।अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को “मित्र” बताते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे कभी-कभी उनकी मदद कर देते हैं।

इस पर सदन में ठहाके भी लगे। पीएम ने कहा कि राजनीतिक समझदारी इसी में है कि जमीनी स्तर पर उभर रही महिला नेतृत्व को अवसर दिया जाए।पीएम मोदी ने पूर्व नेता मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी इस मुद्दे को लंबे समय से उठाते रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा, “देश की बहनों पर भरोसा कीजिए, एक बार 33 फीसदी आरक्षण लागू होने दीजिए, आगे का रास्ता खुद तय हो जाएगा।”

इस दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के हस्तक्षेप से कुछ पल के लिए भाषण रुका, जिस पर पीएम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “मैं आपका आभारी हूं, आपने मेरी पहचान कराई। मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व पूरे देश को साथ लेकर चलना है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान ही उनके लिए सर्वोपरि है और उसी की ताकत है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति देश का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने यह भी माना कि महिला आरक्षण 25-30 साल पहले लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन अब इसे ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि देश की 50 फीसदी आबादी को नीति निर्धारण में भागीदारी देना समय की मांग है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने वालों को जनता ने कभी माफ नहीं किया। उन्होंने 2024 में सर्वसम्मति से पारित होने का जिक्र करते हुए कहा कि जब सभी दल साथ होते हैं, तो यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र का विजय बनता है।
















