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भागलपुर के युवा इंजीनियरों का कमाल: बनाया स्वदेशी कवच, दुश्मन की गोली भी होगी बेअसर

पटना, 13 मई (पटना डेस्क) प्रयोगशाला की चारदीवारी से निकलकर अब बिहार के युवा इंजीनियर आत्मनिर्भर भारत के सपनों को नई उड़ान देने में जुट गए हैं। भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने ऐसा बुलेटप्रूफ आर्मर विकसित किया है, जो आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। नैनोसिलिका और केवलार फाइबर से तैयार यह विशेष नैनोकाम्पोजिट आर्मर प्रारंभिक परीक्षणों में बेहद मजबूत और प्रभावी पाया गया है। इस उपलब्धि ने न केवल कॉलेज बल्कि पूरे बिहार को गौरवान्वित कर दिया है।

यांत्रिकी अभियंत्रण विभाग के अंतिम वर्ष के छात्र विनीत प्रकाश, मुरारी भारद्वाज, अंजली कुमारी और सूरज कुमार ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाया है। प्रो. जनमेजय कुमार और विभागाध्यक्ष डा. शिव रंजन कुमार की देखरेख में तैयार इस आर्मर में नैनोसिलिका आधारित नैनोकाम्पोजिट सामग्री का प्रयोग किया गया है। इसकी मजबूती बढ़ाने के लिए केवलार फाइबर की छह परतें जोड़ी गई हैं, जिससे इसकी प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ गई है। छात्रों द्वारा तैयार सामग्री का हार्डनेस, इम्पैक्ट और अन्य शुरुआती परीक्षण किए गए, जिनके परिणाम उत्साहजनक पाए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आर्मर तीव्र झटकों और प्रहार को सहने में सक्षम दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि भविष्य में यह तकनीक सैनिकों और सुरक्षा बलों की सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है। विभागाध्यक्ष डा. शिव रंजन कुमार ने बताया कि अब इस सामग्री को उन्नत बैलिस्टिक परीक्षण के लिए तेलंगाना स्थित आर्डिनेंस फैक्ट्री, मेडक भेजा जाएगा। यह संस्थान रक्षा उपकरणों और सुरक्षा सामग्रियों के परीक्षण के लिए देशभर में प्रतिष्ठित माना जाता है। यदि वहां परीक्षण सफल रहा, तो यह तकनीक रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सुरक्षा कवच के रूप में नई पहचान बना सकती है।महाविद्यालय प्रशासन इस नवाचार को पेटेंट कराने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। प्राचार्य प्रो. (डा.) आर. एम. तुगनायत ने इसे शोध और नवाचार की मजबूत परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ऊर्जा देने के साथ युवा इंजीनियरों को शोध आधारित तकनीकी विकास के लिए प्रेरित करेगी।

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