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ट्रंप का यू-टर्न: मिडिल ईस्ट जंग ने तोड़ी अमेरिका की कमर, होर्मुज पर बदले तेवर

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (अशोक “अश्क”) मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार बड़ा कबूलनामा करते हुए माना है कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अमेरिकी अभियानों ने देश की क्षमताओं को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। लगातार आक्रामक रुख अपनाने वाले ट्रंप के तेवर अब नरम पड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका मिडिल ईस्ट से बाहर निकलता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य स्वतः खुल जाएगा। यह वही रणनीतिक जलमार्ग है, जिसे ईरान ने पिछले 31 दिनों से अधिकांश अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बाधित कर रखा है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ट्रंप लगातार ईरान को तबाह करने की धमकी दे रहे थे, लेकिन अब उनके बयान में बदलाव साफ झलक रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक नष्ट कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि अभी और कार्रवाई की जरूरत है। ट्रंप ने कहा, “हम ईरान पर हमला कर रहे हैं और यह पूरी तरह विनाशकारी है, लेकिन हमें उनकी हमला करने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना होगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य भी लगभग पूरा हो चुका है।हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। होर्मुज को सुरक्षित रखने के लिए ट्रंप की अपील पर यूरोपीय देशों, चीन और दक्षिण कोरिया ने ठंडी प्रतिक्रिया दी है। यह स्थिति अमेरिका के लिए कूटनीतिक चुनौती बनती जा रही है। पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि अगर जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट तबाह कर देगा। लेकिन अगले ही दिन बातचीत का हवाला देकर हमलों को पहले पांच और फिर दस दिनों के लिए टाल दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बदला हुआ रुख मिडिल ईस्ट में बढ़ते दबाव और वैश्विक अलगाव का संकेत है। फिलहाल, दुनिया की नजरें होर्मुज पर टिकी हैं, जहां हर फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।

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