• Home
  • कृषि
  • किसानों की समस्याओं पर वैज्ञानिकों का मंथन, रबी फसलों से सब्जियों तक की चुनौतियों का निकलेगा वैज्ञानिक समाधान
Image

किसानों की समस्याओं पर वैज्ञानिकों का मंथन, रबी फसलों से सब्जियों तक की चुनौतियों का निकलेगा वैज्ञानिक समाधान

बक्सर, 25 अगस्त (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के बिहार कृषि महाविद्यालय के मुख्य सभागार में मंगलवार को 32वीं क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक, रबी (शारदीय) 2026, जोन III-A का आयोजन किया गया। बैठक में किसानों की खेत स्तर की समस्याओं को वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी समाधान और प्रभावी प्रसार तंत्र से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। किसानों ने वैज्ञानिकों के सामने अपनी समस्याएं रखीं, जिसके आधार पर अनुसंधान की प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा हुई।बैठक की अध्यक्षता डॉ. चंदा कुशवाहा, एसोसिएट डायरेक्टर रिसर्च, बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा डॉ. रूबी रानी, एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य ने की।

मौके पर डॉ. राजेश कुमार, निदेशक प्रशासन, डॉ. पीके सिंह, पूर्व निदेशक अनुसंधान, डॉ. एमके वाधवानी, प्राचार्य CABM, डॉ. संजय कुमार, डीन पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज, डॉ. फेजा अहमद, निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, वैज्ञानिक, अनुसंधान सलाहकार समूहों के सदस्य और कृषि विज्ञान केंद्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे। भागलपुर, बांका, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर और शेखपुरा के किसानों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर अपनी समस्याएं साझा कीं। गेहूं की कम उत्पादकता, समय पर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और उपयुक्त किस्मों की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे रहे। DBW-187, DBW-303, HI-1563 और HI-1621 जैसी किस्मों पर चर्चा करते हुए रोग-सहनशील और क्षेत्र के अनुकूल किस्मों के चयन पर जोर दिया गया।दलहन और तिलहनी फसलों में खरपतवार प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज, बीज उपचार और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

सब्जी उत्पादकों ने बैंगन में शूट एवं फल छेदक, कद्दूवर्गीय फसलों में फल मक्खी और विकृत फल, पत्तागोभी में कीट प्रकोप तथा प्याज में पत्ती सूखने की समस्या उठाई। इनके नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप, बीज उपचार और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में कृषि यंत्रीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, ड्रिप-फर्टिगेशन, मृदा एवं जल प्रबंधन और एकीकृत खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई। कृषि विभाग के डॉ. प्रभात कुमार सिंह, उप परियोजना निदेशक, ATMA, भागलपुर तथा संयुक्त निदेशक, बीज, जमुई श्री अभिनव ने भी सुझाव दिए।बैठक का मुख्य संदेश रहा कि किसानों की वास्तविक समस्याएं ही अनुसंधान की प्राथमिकता बनें और वैज्ञानिक समाधान सीधे खेत तक पहुंचे। वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग, बीज तंत्र और किसानों के बीच निरंतर समन्वय से उत्पादन, संसाधन दक्षता और किसानों की आय में स्थायी सुधार का रास्ता तैयार करने पर बल दिया गया। मंच संचालन डॉ. नेहा पांडेय ने किया।

Releated Posts

कृषि शिक्षा में AI की दस्तक: बीएयू सबौर में 10 दिन चला हाईटेक प्रशिक्षण, शिक्षकों ने सीखे शोध के नए गुर

बक्सर, 14 अक्टूबर (विक्रांत) कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव के…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 14, 2026

जलजमाव ने गन्ने पर बरपाया कहर: जड़ों में सड़न से सूख रही फसल, मजदूरों की कमी ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

मधुबनी, 14 अक्टूबर (आशीष यादव) प्रखंड क्षेत्र में लगातार हुई बारिश और खेतों में जलजमाव ने किसानों की…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 14, 2026

समस्तीपुर में फलों की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर: अमरुद-नींबू के लिए 60 हेक्टेयर का लक्ष्य, अनुदान से बढ़ेगी आमदनी

समस्तीपुर, 14 अक्टूबर (हर्षिता “अश्क”) जिले में किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 14, 2026

वैज्ञानिक खेती से बदलेगी पान की तस्वीर, 25 किसानों को मिला उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण

बक्सर, 10 अक्टूबर (विक्रांत) पान की खेती को अधिक उत्पादनकारी, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी बनाने की दिशा में बिहार…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 10, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top