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बिहार में बना देश का पहला सिंदूर ग्राम, बीएयू सबौर की ऐतिहासिक पहल से रामासी गांव लिखेगा समृद्धि की नई इबारत

बक्सर, 19 जुलाई (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भागलपुर जिले के रामासी गांव को देश का पहला “सिंदूर ग्राम” घोषित कर नई मिसाल कायम की है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के नेतृत्व में आयोजित भव्य कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, महिला किसानों और ग्रामीणों की मौजूदगी में इस महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सन्हौला के विधायक सुभानंद मुकेश एवं रामासी की मुखिया शोभा देवी रहीं।

कार्यक्रम के दौरान एक एकड़ भूमि में 7-8 माह आयु के 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण किया गया, जबकि 100 महिला किसानों के बीच सिंदूर के पौधे वितरित किए गए। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से हॉर्टिकल्चर टूल किट, पावर नैपसैक स्प्रेयर और स्वीपिंग मशीन भी प्रदान की गई। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और महिला उद्यमिता को भी नई दिशा देगी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि सीता सिंदूर केवल सुहाग का प्रतीक नहीं, बल्कि खाद्य, औद्योगिक और औषधीय क्षेत्रों में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।

वैज्ञानिकों ने किसानों से जैविक पद्धति से सिंदूर की खेती अपनाने का आह्वान किया और जानकारी दी कि बढ़ती मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय टिशू कल्चर तकनीक से बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन पर कार्य कर रहा है।कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने घोषणा की कि अब रामासी गांव विश्वभर में “सिंदूर ग्राम” के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट तथा सीता सिंदूर का जीआई टैग प्राप्त कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

किसानों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जाएगा तथा गांव में सिंदूर प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर शुद्ध प्राकृतिक सिंदूर पाउडर तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनाट्टो (Annatto) का उपयोग अमूल सहित कई खाद्य उद्योगों में प्राकृतिक रंग के रूप में होता है, जबकि बिक्सिन ऑयल की औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है। भविष्य में रामासी में सिंदूर नर्सरी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी एकीकृत गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी। साथ ही दानापुर में विश्व का पहला “सिंदूर पार्क” विकसित करने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह मॉडल गांव आने वाले वर्षों में ग्रामीण समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय उदाहरण बनेगा।

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