बक्सर, 17 अगस्त (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के कृषि जलवायु क्षेत्र जोन-III बी के अंतर्गत रबी 2026-27 की कृषि अनुसंधान एवं प्रसार रणनीति तय करने के लिए सोमवार को कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना में 32वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, जलवायु अनुकूल खेती, कृषि स्टार्टअप, जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग तथा शोध को खेत तक पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान की प्राथमिकताएं तय करना तथा तकनीकी हस्तांतरण को मजबूत बनाना रहा। इस दौरान गेहूं, मक्का, चना, मसूर, मटर, सरसों, राई, जौ सहित अन्य दलहनी एवं तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए क्षेत्र विशेष के अनुरूप अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत किस्मों के चयन, समय पर बुआई, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई प्रणाली, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों और किस्मों का विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए अनुसंधान, प्रसार और किसान के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी। किसानों की वास्तविक समस्याओं और फीडबैक को शोध का आधार बनाने तथा प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया। कृषि आधारित स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि मशीनरी, डिजिटल कृषि, जैविक इनपुट, भंडारण, पैकेजिंग और विपणन के क्षेत्र में युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर बल दिया गया।

साथ ही बिहार के जीआई उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित कर किसानों की आय बढ़ाने पर भी मंथन हुआ। बैठक में संयुक्त निदेशक सस्य-सह-वरीय पदाधिकारी राजीव कुमार, निदेशक शोध डॉ. ए.के. सिंह, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रणधीर कुमार, आईसीएआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.के. चौधरी, डॉ. पारस नाथ, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. सनोज कुमार सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि शोध, नवाचार, स्टार्टअप, जीआई उत्पाद और बाजार को एकीकृत कर ही बिहार की कृषि को नई ऊंचाई और किसानों को स्थायी समृद्धि दिलाई जा सकती है।


















