बक्सर, 11 अगस्त (विक्रांत) बिहार के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की मुहिम अब तेज हो गई है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में मंगलवार को आयोजित 20वीं जीआई समीक्षा बैठक एवं तीसरे पीएमआरसी सत्र में राज्य के स्थानीय उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पहचान दिलाने की दिशा में हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में कुल 28 जीआई आवेदनों की स्थिति पर मंथन हुआ, जिनमें 10 आवेदन अंतिम सीजीएम चरण में पहुंच चुके हैं। इससे आने वाले समय में बिहार के कई और पारंपरिक उत्पादों को जीआई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।अनुसंधान निदेशक एवं जीआई फैसिलिटेशन सेंटर, बीएयू के प्रधान अन्वेषक डॉ. अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीआई पंजीकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

वर्तमान में भागलपुरी जरदालू, शाही लीची, कतरनी चावल, मगही पान और मिथिला मखाना समेत पांच उत्पाद जीआई पंजीकरण हासिल कर चुके हैं। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि बिहार की कृषि और सांस्कृतिक विरासत को जीआई पहचान दिलाना केवल प्रमाण-पत्र हासिल करने तक सीमित नहीं है। जीआई टैग स्थानीय उत्पादों की विशिष्टता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तैयार करने का मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों, किसानों और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से इस दिशा में लगातार काम कर रहा है। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जीआई सुविधा केंद्र के माध्यम से बिहार के विशिष्ट उत्पादों की पहचान, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और पंजीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जीआई पंजीकरण के बाद उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और बाजार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।बैठक में शाहाबाद अनरसा, मनेर का लड्डू और कोसी जूट सहित नए उत्पादों को जीआई पहचान दिलाने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। किसानों के बीच जीआई उत्पादों को लेकर जागरूकता बढ़ाने और उपलब्ध निधि के प्रभावी इस्तेमाल पर भी विचार-विमर्श किया गया।बैठक में बीएयू के वैज्ञानिकों के अलावा नाबार्ड की महाप्रबंधक अनामिका और सहायक महाप्रबंधक जितेंद्र कुमार साहू ऑनलाइन जुड़े, जबकि भागलपुर की डीडीएम अर्चना प्रिया मौजूद रहीं। विश्वविद्यालय का लक्ष्य जीआई पहचान को किसानों की आय, ब्रांडिंग और व्यापक उपभोक्ता नेटवर्क से जोड़कर बिहार के पारंपरिक उत्पादों को नई बाजार शक्ति देना है।


















