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59 साल बाद बांकीपुर में इतिहास ने ली करवट: प्रशांत किशोर ने बीजेपी का अभेद्य किला ढहाया, दोहराई 1967 की कहानी

पटना, 05 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में शानदार जीत दर्ज करते हुए नया इतिहास रच दिया। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराकर न केवल उपचुनाव अपने नाम किया, बल्कि 59 वर्ष पुरानी एक ऐतिहासिक राजनीतिक घटना की याद भी ताजा कर दी। बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। नितिन नवीन इस सीट से लगातार 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव जीतते रहे थे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी और बाद में राज्यसभा चले गए। उनके इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने इस अभेद्य माने जाने वाले किले को भेदकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।प्रशांत किशोर की यह जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसकी तुलना 1967 के ऐतिहासिक चुनाव से की जा रही है। उस समय वर्तमान बांकीपुर सीट को पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। कांग्रेस से अलग होकर जन क्रांति दल बनाने वाले महामाया प्रसाद सिन्हा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय को इसी सीट से करीब 20 हजार वोटों से पराजित कर पूरे बिहार की राजनीति को नई दिशा दी थी। उस ऐतिहासिक जीत के बाद महामाया प्रसाद सिन्हा बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 1967 और 2026 के चुनावों में कई समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों ही मौकों पर नई राजनीतिक ताकत ने स्थापित नेतृत्व को चुनौती दी और जनता ने अप्रत्याशित जनादेश दिया। जिस तरह महामाया प्रसाद सिन्हा ने कांग्रेस के मजबूत किले को ध्वस्त किया था, उसी तरह प्रशांत किशोर ने भाजपा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया।विशेषज्ञों का कहना है कि यह जीत केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक धारा का संकेत भी मानी जा रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रशांत किशोर की यह सफलता जन सुराज के लिए बड़ा मनोबल साबित हो सकती है, जबकि भाजपा और अन्य दलों के लिए यह परिणाम नई रणनीति बनाने का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

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