समस्तीपुर, 16 जुलाई (हरिनारायण सिंह हरि) हिन्दी और मैथिली साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण’ के निधन पर बुधवार देर शाम स्थानीय तिरहुत एकेडमी के सभागार में भावभीनी शोकसभा आयोजित की गई। शहर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को समस्तीपुर के साहित्यिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।शोकसभा की अध्यक्षता तिरहुत एकेडमी के प्रधानाचार्य अशोक कुमार साह ने की, जबकि संचालन कवि आचार्य परमानंद प्रभाकर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. तरुण के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने से हुई।

इसके बाद उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत साहित्यकार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण’ ने हिन्दी और मैथिली साहित्य को अपनी लेखनी से समृद्ध किया। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगी। उन्होंने कहा कि उनके निधन से जो साहित्यिक शून्य पैदा हुआ है, उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।

शोकसभा में हरिनंदन साह, हरिनारायण सिंह ‘हरि’, नरेन्द्र कुमार सिंह ‘त्यागी’, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, आचार्य परमानंद प्रभाकर, रामाश्रय प्रसाद सिन्हा, राजकुमार चौधरी, प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. रामसूरत दास, विपिन कुमार, विनोद कुमार, कृष्ण बिहारी लाल, देवनारायण अंशुमाली, अमरेंद्र कर्ण, नीतीश कुमार सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि डॉ. तरुण का साहित्यिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।


















