नई दिल्ली, 12 जुलाई (अशोक “अश्क”) बैंक खाता खुलवाने से लेकर म्यूचुअल फंड में निवेश, नया सिम कार्ड लेने, बीमा कराने या किसी वित्तीय ऐप का उपयोग करने तक आज लगभग हर जगह KYC (Know Your Customer) अनिवार्य हो गई है। इसका उद्देश्य ग्राहक की पहचान और पते का सत्यापन कर यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित सेवा का उपयोग सही व्यक्ति ही कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार KYC वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। KYC का सबसे बड़ा उद्देश्य फर्जी खाते, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य वित्तीय अपराधों पर रोक लगाना है। यदि कोई व्यक्ति नकली दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खोलने की कोशिश करता है, तो आधार, पैन और अन्य पहचान पत्रों के सत्यापन के जरिए ऐसी कोशिशों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

बैंक खाता खोलने, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड में निवेश, डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट, बीमा पॉलिसी, सिम कार्ड तथा कई डिजिटल वॉलेट और वित्तीय ऐप्स के उपयोग के लिए KYC आवश्यक होती है। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और कुछ मामलों में पासपोर्ट आकार की फोटो की जरूरत पड़ती है। अब e-KYC के जरिए यह प्रक्रिया और आसान हो गई है। पहले जहां शाखा में जाकर दस्तावेज जमा करने पड़ते थे, वहीं अब ऑनलाइन पहचान सत्यापन, वीडियो KYC और OTP आधारित प्रक्रिया के माध्यम से कई सेवाएं घर बैठे पूरी की जा सकती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर Re-KYC भी कराई जाती है, ताकि ग्राहक की जानकारी अद्यतन बनी रहे।

यदि पता, मोबाइल नंबर या अन्य विवरण बदलते हैं, तो संबंधित संस्था रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए कह सकती है। KYC पूरी नहीं होने पर बैंकिंग लेनदेन, निवेश सेवाएं और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को KYC के नाम पर होने वाली ठगी से भी सतर्क रहने की सलाह दी है। केवल बैंक या अधिकृत संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या शाखा के माध्यम से ही KYC कराएं। किसी अनजान व्यक्ति के साथ आधार, पैन, OTP या UPI PIN साझा न करें। याद रखें, कोई भी बैंक या अधिकृत संस्था फोन पर OTP या UPI PIN नहीं मांगती। यही सतर्कता आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।


















