पटना, 17 अप्रैल (अविनाश कुमार) जदयू विधायक दल की अहम बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन सियासी हलकों में जबरदस्त हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक संवाद होगा, जिसमें वे पार्टी की आगामी रणनीति और एनडीए गठबंधन में जदयू की भूमिका को लेकर स्पष्ट संकेत दे सकते हैं। नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री शामिल हैं, जिनके द्वारा भी पार्टी की प्राथमिकताओं पर विचार रखे जाने की संभावना है।

इससे यह बैठक और भी अहम बन गई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने संकेत दिए हैं कि बैठक से कोई बड़ा संदेश निकल सकता है। उन्होंने कहा कि एजेंडा भले सार्वजनिक नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार के फैसले अक्सर चौंकाने वाले होते हैं।शराबबंदी को लेकर उठ रही मांगों पर उन्होंने तीखा पलटवार किया। नीरज कुमार ने कहा कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वे पहले अपने घर की महिलाओं से लिखवाकर सोशल मीडिया पर डालें कि शराबबंदी खत्म होनी चाहिए, तब जनता का रुख साफ हो जाएगा।

उन्होंने दो टूक कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून खत्म नहीं होगा। नरेंद्र मोदी जैसे बड़े नेताओं द्वारा भी इसकी सराहना की जा चुकी है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के बावजूद विरोध करना उचित नहीं है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा वेतन नहीं मिलने के आरोपों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। कहा कि प्रक्रिया को समझना जरूरी है। वेतन निर्गत होने से पहले एजी क्लीयरेंस अनिवार्य होता है, जिसके बाद ही भुगतान किया जाता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक जदयू की भविष्य की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य की राजनीति नए समीकरणों की ओर बढ़ रही है। सभी की नजरें अब नीतीश कुमार के भाषण पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि आने वाले दिनों में जदयू किस दिशा में आगे बढ़ेगी और एनडीए में उसकी ताकत कितनी प्रभावी रहने वाली है।बैठक के नतीजे पर बिहार की राजनीति की नजर टिकी रहेगी और इसके दूरगामी असर देखने को मिलेंगे।
















