पटना, 15 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। करीब दो दशक तक सत्ता के शीर्ष पर रहे नीतीश कुमार अब पूर्व मुख्यमंत्री बन चुके हैं। राज्य में अब भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बन गई है और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल ली है। इस सत्ता परिवर्तन के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) की ओर से तीखी और भावनात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीतीश कुमार के इस्तीफे को “महान त्याग” बताते हुए इसे सिद्धांतों की जीत करार दिया है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि सत्ता को ठोकर मारना हर किसी के बस की बात नहीं होती। “नीतीश कुमार जी ने जो उदाहरण पेश किया है, वह भारतीय राजनीति में विरले ही देखने को मिलता है,” उन्होंने कहा।नीरज कुमार ने नई सरकार को भी साफ संदेश दिया कि सत्ता भले बदल गई हो, लेकिन विकास का मॉडल वही रहेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि “सात निश्चय” केवल योजना नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य का विजन है और इसे बिना किसी बदलाव के आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार इस रोडमैप को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगी। अपने बयान में जदयू प्रवक्ता ने पूर्ववर्ती दौर की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार ने कभी “जंगलराज, भय और जातीय उन्माद” का दौर देखा है, लेकिन उस अंधकार से बाहर निकालने का काम नीतीश कुमार ने किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय समाज को बांटकर सत्ता हासिल की जाती थी, जबकि नीतीश कुमार ने समाज को जोड़ने की राजनीति की। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अपनी भूमिका निभाने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार लौटकर विकास की नई परिभाषा गढ़ी। पिछले 21 वर्षों में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन जनता के प्रति उनका समर्पण कभी नहीं बदला। सत्ता परिवर्तन के इस दौर में बिहार की राजनीति एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन जदयू ने साफ कर दिया है कि वैचारिक लड़ाई अभी जारी रहेगी।

















