राँची, 14 अप्रैल (मोहन शर्मा) झारखंड के सरकारी महकमों में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस विभाग में ट्रेजरी से अवैध निकासी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब पशुपालन विभाग में करोड़ों के गबन का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (IAHP) के लेखापाल मुनिंद्र कुमार पर वेतन मद में बड़े पैमाने पर अवैध निकासी का आरोप लगा है।

जांच में सामने आया कि मुनिंद्र कुमार का वास्तविक मासिक वेतन महज 55 हजार रुपये था, लेकिन वह हेराफेरी और मिलीभगत के जरिए हर महीने 3 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल रहा था। यह खेल वर्ष 2022-23 से लगातार जारी था, जिससे लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। घोटाले को अंजाम देने का तरीका बेहद चालाकी भरा था। आरोपी रोकड़ बही में सही आंकड़े दर्ज कर अधिकारियों से हस्ताक्षर करा लेता था, लेकिन कंप्यूटर में डेटा फीड करते समय राशि में बदलाव कर देता था।

इस तरह ट्रेजरी से अतिरिक्त रकम की निकासी आसानी से हो जाती थी और लंबे समय तक किसी को भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा तब हुआ जब संस्थान में नए निदेशक देवनाथ चौरसिया ने 1 सितंबर 2025 को पदभार संभाला। उन्होंने बैंक स्टेटमेंट और रोकड़ बही का मिलान शुरू किया, जिससे गड़बड़ी उजागर हुई। मुनिंद्र की आलीशान जीवनशैली शराब की लत और 3-4 लग्जरी कारों का शौक पहले से ही संदेह के घेरे में था।निदेशक ने तुरंत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की।

कमेटी की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 2 मार्च 2026 को मुनिंद्र कुमार को पद से हटा दिया गया। साथ ही विभागीय सचिव और पशुपालन निदेशक को लिखित शिकायत भेजकर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस बड़े घोटाले ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

















