
साहित्य में आज बिहार के बेगूसराय जिले की प्रसिद्ध साहित्यकार सुनीता सुमन जी की बेहतरीन ग़ज़ल
ज़िंदगी का कोई तो पता दे मुझे।
या क़ज़ा का पता ही बता दे मुझे।।
पर कटे एक पंछी सी पहचान है।
ज़िंदगी जी सकूं हौसला दे मुझे।।
भागते भागते थक गई हूं सनम।
प्यार से देके लोरी सुला दे मुझे।।
ज़िन्दगी के लिए जागते जागते।
थक गई हूँ कज़ा तू सुला दे मुझे।।
आरज़ू है फ़क़त मेरी इतनी सी बस।
ग़म न आऐं कभी ये दुआ दे मुझे।।
रास आती नहीं ज़िंदगी ये हमें।
ऐ ख़ुदा कुछ तो अब मशवरा दे मुझे ।।
दर्द होता बहुत है मुझे ऐ ‘सुमन’
पल सुकूं के कोई हमनवा दे मुझे।।
~ डॉ सुनीता ‘सुमन’

















