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7 साल बाद ईरानी तेल की वापसी: संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, वडीनार की ओर बढ़ा टैंकर

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान का कच्चा तेल लेकर एक टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है। ‘पिंग शुन’ नामक यह तेल टैंकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें लगभग 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ है।

वेसल ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर को 4 मार्च के आसपास ईरान के प्रमुख तेल टर्मिनल खर्ग द्वीप से लोड किया गया था और इसके 4 अप्रैल तक वडीनार पहुंचने की संभावना है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस तेल का इस्तेमाल भारत की कौन-सी रिफाइनरी करेगी।दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने 21 मार्च को ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में एक महीने की आंशिक ढील दी है। यह छूट खासतौर पर उन तेल खेपों पर लागू होती है जो पहले से टैंकरों में लदी हुई हैं। इसका मकसद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर तेल की कीमतों को काबू में रखना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म के विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों के पास फिलहाल सीमित भंडार है, ऐसे में ईरानी तेल की वापसी राहत दे सकती है। गौरतलब है कि 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया था, जबकि इससे पहले ईरान भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। हालांकि इस सौदे के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या भुगतान तंत्र को लेकर है, क्योंकि ईरान अभी भी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली SWIFT से बाहर है। वैश्विक परिदृश्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका भी अहम है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में भारत, जो अपनी 88% तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, हर अतिरिक्त आपूर्ति को रणनीतिक रूप से अहम मान रहा है।

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