पटना, 23 अप्रैल (पटना डेस्क) बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी ट्रेनिंग स्कूल का एक नोटिस पूरे राज्य में विवाद का कारण बन गया है। 16 अप्रैल को जारी इस नोटिस में छात्राओं को सख्त चेतावनी दी गई थी कि शैक्षणिक सत्र के दौरान शादी करना प्रतिबंधित है। आदेश में साफ लिखा गया था कि यदि कोई छात्रा विवाह करती है तो उसका नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।

नोटिस पर प्रधानाचार्या मांसी सिंह के हस्ताक्षर और स्कूल की आधिकारिक मुहर थी, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई। जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, छात्राओं और अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार देते हुए महिलाओं के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। छात्राओं ने आरोप लगाया कि यह आदेश उनके निजी जीवन में सीधा हस्तक्षेप है। मामला तूल पकड़ते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और तत्काल संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया।

बढ़ते दबाव के बीच अंततः स्कूल को अपना विवादित नोटिस वापस लेना पड़ा। विवाद पर सफाई देते हुए प्रधानाचार्या मांसी सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य शादी पर रोक लगाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नर्सिंग कोर्स में 100 प्रतिशत क्लिनिकल और 85 प्रतिशत थ्योरी उपस्थिति अनिवार्य है। शादी के बाद कई छात्राएं अटेंडेंस पूरी नहीं कर पातीं, जिससे शैक्षणिक दिक्कतें पैदा होती हैं और अभिभावकों का दबाव बढ़ता है।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस नोटिस को गैर-जरूरी बताते हुए साफ कर दिया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को छात्राओं के निजी फैसलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने बिहार में महिला शिक्षा, अधिकार और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुशासन जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अनदेखी गंभीर सवाल खड़े करती है।













