पटना, 23 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सांसद पप्पू यादव एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा। आयोग की इस कार्रवाई के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

आयोग की अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, नोटिस का जवाब देने के बजाय सांसद ने सोशल मीडिया के जरिए आयोग की शक्तियों को ही चुनौती दे डाली। इतना ही नहीं, उन पर आयोग अध्यक्ष के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।

अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सांसद ने एक पुरानी तस्वीर साझा कर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ तस्वीरें होना सामान्य बात है और इसे गलत तरीके से पेश करना दुर्भावनापूर्ण है। अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 1997-98 में छात्र राजनीति से शुरुआत कर उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई है।

अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उन्हें महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है, जिसे वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रही हैं। उन्होंने सांसद के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की घोषणा भी की, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, पूरे मामले पर पप्पू यादव की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।













