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लेबर कोड का असर: टाटा कमिंस ने बदला सैलरी स्ट्रक्चर, भत्तों का विलय, कर्मचारियों की जेब पर क्या होगा असर

पटना, 29 अप्रैल (पटना डेस्क) औद्योगिक नगरी जमशेदपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रमुख कंपनी टाटा कमिंस (TCPL) ने केंद्र सरकार के नए लेबर कोड को ध्यान में रखते हुए अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव कर दिया है। कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के मुताबिक यह नया सैलरी स्ट्रक्चर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा।कंपनी के एचआर एवं आईआर लीडर दीपेश चौलिया द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, वेतन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के उद्देश्य से भत्तों का पुनर्गठन किया गया है। नए ढांचे में वेतन को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है—अनिवार्य घटक और बहिष्कृत घटक।

अनिवार्य घटकों में बेसिक सैलरी, वेरिएबल डीए (VDA) और एजुकेशन अलाउंस को शामिल किया गया है। वहीं, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), यूनिफॉर्म मेंटेनेंस, परफॉर्मेंस पे और सर्विस अलाउंस को बहिष्कृत श्रेणी में रखते हुए इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।इस बदलाव का सबसे बड़ा पहलू विभिन्न भत्तों का एकीकरण है। अब तक कर्मचारियों को अलग-अलग मिलने वाले एलटीए, सप्लीमेंट्री अलाउंस, गुड सर्विस अलाउंस, टीम वर्क अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, स्पेशल अलाउंस और हॉस्टल अलाउंस को खत्म कर दिया गया है। इन सभी को अब एक ही “कन्वेंस अलाउंस” के तहत समाहित कर दिया गया है, जिससे वेतन संरचना अधिक सरल हो जाएगी। कंपनी प्रबंधन ने इस बदलाव को लेकर कर्मचारियों के बीच किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित किए।

इन सत्रों में स्पष्ट किया गया कि नए लेबर कोड के तहत वेतन की परिभाषा में बदलाव के कारण कंपनियों के लिए पे-रोल स्ट्रक्चर में संशोधन करना अनिवार्य हो गया है।औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का दीर्घकालिक लाभ कर्मचारियों को मिलेगा। वेतन ढांचे के पुनर्गठन से भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी की गणना का आधार मजबूत होगा, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि में वृद्धि संभव है।हालांकि, कुछ कर्मचारियों के बीच यह चिंता भी देखी जा रही है कि अल्पकालिक तौर पर इन बदलावों का टेक-होम सैलरी पर असर पड़ सकता है। बावजूद इसके, कंपनी का दावा है कि यह कदम कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। टाटा कमिंस का यह निर्णय न केवल उसके आंतरिक प्रबंधन में बदलाव का संकेत है, बल्कि अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जो आने वाले समय में नए श्रम कानूनों को लागू करने की तैयारी कर रही हैं।

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