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रोहिणी-मृगशिरा बीत गए: बीज नहीं पहुंचे, कृषि विभाग की सुस्ती से किसान बेहाल, 109 क्विंटल के बदले मिले सिर्फ 10 क्विंटल बीज

पटना, 23 जून (पटना डेस्क) खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही कृषि विभाग की लापरवाही और सरकारी व्यवस्था की धीमी कार्यशैली एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ती दिख रही है। धान की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र बीत जाने के बाद भी जिले में पर्याप्त मात्रा में सरकारी बीज उपलब्ध नहीं हो सके हैं। स्थिति यह है कि जिले के लिए निर्धारित 109 क्विंटल धान बीज के लक्ष्य के मुकाबले महज 10 क्विंटल बीज की आपूर्ति हुई है, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है। कृषि विभाग के सामने भी अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा कि इतनी कम मात्रा में उपलब्ध बीज को जिले के विभिन्न प्रखंडों में किस आधार पर वितरित किया जाए।

यदि किसी एक प्रखंड को पर्याप्त मात्रा में बीज दिया जाता है तो अन्य प्रखंडों के किसान पूरी तरह वंचित रह जाएंगे। जानकारी के अनुसार जिले को जो 10 क्विंटल बीज प्राप्त हुआ है, वह केवल धान की हाइब्रिड किस्म का है। वहीं मक्का, दलहन और अन्य खरीफ फसलों के बीज अब तक सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंच सके हैं। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। समय पर बीज नहीं मिलने से किसानों को मजबूरी में निजी बाजार का रुख करना पड़ा। किसानों ने ऊंचे दामों पर स्थानीय बीज खरीदकर बिचड़ा डालने का काम शुरू कर दिया है। जिले में लगभग 50 प्रतिशत धान का बिचड़ा डाला जा चुका है, जबकि मक्का की खेती भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, किसान अब मौसम और कमजोर गुणवत्ता वाले बीजों की दोहरी मार झेल रहे हैं।

किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी और तपती जमीन के कारण सामान्य बीजों से तैयार पौधे नष्ट हो रहे हैं। अरविंद कुमार, मनोज शर्मा और राम भवन कुशवाहा सहित कई किसानों ने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण सिंचाई के बाद भी पौधे बच नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्नत और प्रमाणित बीजों में प्रतिकूल मौसम को झेलने की अधिक क्षमता होती है, लेकिन इस बार सरकारी आपूर्ति समय पर नहीं होने के कारण उन्हें सामान्य बीजों पर निर्भर रहना पड़ा है। किसानों का आरोप है कि यदि जल्द पर्याप्त बीज उपलब्ध नहीं कराए गए तो खरीफ उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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