समस्तीपुर, 20 मई (हर्षिता “अश्क”) इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब गांवों तक पहुंचने लगा है। सोशल मीडिया पर खाद संकट की अफवाह फैलते ही जिले में किसानों के बीच हड़कंप मच गया है। धान रोपनी शुरू होने में अभी करीब एक महीना बाकी है, लेकिन किसान अभी से डीएपी और यूरिया की खरीद कर घरों में भंडारण करने लगे हैं। इसका फायदा उठाकर कई दुकानदार मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक डीएपी खाद की सरकारी कीमत 1350 रुपये प्रति बैग है, लेकिन बाजार में इसे 1800 से 1900 रुपये तक बेचा जा रहा है।

वहीं 266.50 रुपये वाली यूरिया की बोरी 300 से 350 रुपये तक में किसानों को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार खुलेआम अधिक दाम मांग रहे हैं और मजबूरी में महंगा खाद खरीदना पड़ रहा है। मुसरीघरारी के किसान बलवंत चौधरी ने बताया कि बाजार में चर्चा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण आगे खाद की भारी कमी हो सकती है। इसी डर से किसान अभी से खाद जमा कर रहे हैं।कई किसानों ने बिना पॉश मशीन के चोरी-छिपे खाद बेचने और नकद लेकर कालाबाजारी करने का आरोप लगाया है। एक युवा किसान ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उसने डीएपी की बोरी 1900 रुपये और यूरिया 330 रुपये से अधिक कीमत पर खरीदी।

इधर जिला कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं को फिलहाल बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही खाद की बिक्री होगी। बावजूद इसके कई इलाकों से अवैध बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और सरकारी सूचना पर भरोसा करने की अपील की है। वहीं प्रशासन से खाद की कालाबाजारी रोकने और तय कीमत पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है।













