बक्सर, 30 सितम्बर (विक्रांत) बिहार में मखाना उत्पादन को नई ऊंचाई देने और किसानों को कच्चे उत्पाद की बिक्री से आगे बढ़ाकर मूल्य संवर्धन से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग, बिहार सरकार ने केंद्रीय क्षेत्र योजनान्तर्गत मखाना की सूक्ष्म स्तरीय प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित छह कृषि विज्ञान केंद्रों का चयन किया है। इन इकाइयों के शुरू होने से मखाना उत्पादक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर प्राथमिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। किसान अब केवल कच्चे मखाने की बिक्री तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर बाजार से बेहतर जुड़ाव हासिल कर सकेंगे।

कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्रसंस्करण तकनीक, स्वच्छता, गुणवत्ता, पैकेजिंग और उद्यमिता का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।यह पहल मखाना की फार्म-टू-मार्केट वैल्यू चेन को मजबूत करने के साथ ग्रामीण रोजगार और मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने में सहायक होगी। बिहार देश में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार देश के कुल उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब 85 से 90 प्रतिशत है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मखाना बिहार की विशिष्ट कृषि धरोहर है और किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं रखता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय उन्नत बीज और उत्पादन तकनीक से लेकर कटाई, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को वैज्ञानिक आधार देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कुलपति ने कहा कि प्रसंस्करण पर जोर बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य और ग्रामीण युवाओं को नए उद्यम एवं रोजगार के अवसर मिलेंगे।

















