नई दिल्ली, 05 अप्रैल (अशोक “अश्क”) हिंदी सिनेमा में देशभक्ति की पहचान बन चुके मनोज कुमार का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। साल 1956 में फिल्म गंगू तेली से छोटे से रोल के साथ शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने 1957 की फिल्म फैशन में भिखारी के किरदार से पहचान बनाई और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्म वो कौन थी? ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने न सिर्फ अभिनय बल्कि निर्देशन में भी अपनी खास छाप छोड़ी।

वहीदा रहमान के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई और दोनों की दोस्ती भी इंडस्ट्री में मिसाल मानी जाती है। 1965 में आई उनकी फिल्म शहीद को लाल बहादुर शास्त्री ने सराहा। उनके सुझाव पर मनोज कुमार ने 1967 में उपकार बनाई, जिसने उन्हें “भारत कुमार” का खिताब दिलाया। इस फिल्म में किसान और सैनिक के रूप में उनका किरदार आज भी याद किया जाता है। फिल्म उपकार में प्राण को ‘मलंग चाचा’ के रोल में लेकर उन्होंने उनकी छवि ही बदल दी। आगे चलकर 1981 की फिल्म क्रांति ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया।

खास बात यह भी है कि जब अमिताभ बच्चन संघर्ष कर रहे थे, तब मनोज कुमार ने उन्हें फिल्म रोटी कपड़ा और मकान में बड़ा मौका दिया, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। मनोज कुमार का योगदान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा में देशभक्ति की भावना को जीवंत करने तक फैला हुआ है।
















