नई दिल्ली, 15, अप्रैल (अशोक “अश्क”) ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार का कड़ा रुख लगातार सामने आ रहा है। इसी क्रम में अब देश की पहली महिला प्रदर्शनकारी को फांसी देने की तैयारी की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि बीता हेम्मती नाम की महिला उन लगभग 1,600 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें पिछले एक वर्ष के दौरान इस्लामी गणराज्य में मौत की सजा सुनाई गई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, बीता हेम्मती को जनवरी में भड़के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में फांसी दी जानी है। ये वही प्रदर्शन हैं, जिन्हें सरकारी सुरक्षाबलों ने सख्ती और बल प्रयोग के साथ दबा दिया था। विपक्षी संगठन ‘नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान’ की प्रेस रिलीज में दावा किया गया है कि सरकार ने हेम्मती पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें विस्फोटक गतिविधियों में शामिल होना, हथियारों का उपयोग करना, कंक्रीट ब्लॉक फेंकना, विरोध प्रदर्शनों में भाग लेना और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना शामिल है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हेम्मती के पति मोहम्मदरेजा माजिद असल सहित दो अन्य लोगों—बेहरोज और कोरोश जमानीनेजाद—को भी फांसी की सजा सुना दी गई। ये सभी एक ही अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहते थे। आरोप है कि इन पर जल्दबाजी में मुकदमा चलाया गया और इसके साथ ही उनकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गईं।

इस मामले में पांचवें आरोपी, जो हेम्मती के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं, को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश और सरकार विरोधी प्रचार के आरोप में छह साल की सजा दी गई है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन सभी आरोपियों पर विदेशी शत्रु ताकतों के साथ मिलकर काम करने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, अभी तक फांसी की तारीख तय नहीं की गई है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी हुई है।
















