पटना, 27 जून (अविनाश कुमार) बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार अन्य राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के आधार पर नया विश्वविद्यालय अधिनियम (यूनिवर्सिटी एक्ट) लागू करने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में शुक्रवार को राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री संजय सिंह टाइगर, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, उच्च शिक्षा के नियामकीय ढांचे में व्यापक सुधार के लिए देश के 15 राज्यों के विश्वविद्यालय अधिनियमों का अध्ययन कर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। बैठक में इस प्रस्ताव के उपयुक्त प्रावधानों को नए विश्वविद्यालय अधिनियम में शामिल करने पर सहमति बनी। बैठक में राज्य के नवस्थापित 211 सरकारी डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की संविदा आधारित नियुक्ति के लिए केंद्रीकृत भर्ती प्रक्रिया अपनाने की जानकारी भी दी गई। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता आने की उम्मीद जताई गई है।

संकाय विकास कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास के लिए वर्ष में कम-से-कम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि नए विश्वविद्यालय अधिनियम और सुधारात्मक कदमों से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी-केंद्रित बनेगी।

















