पटना, 02 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार के लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य के 18 जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने की मंजूरी दे दी है। लंबे समय से जिन जिलों में केंद्रीय विद्यालय की मांग उठ रही थी, वहां अब गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा का रास्ता खुल गया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि मंजूरी मिलने के बाद भी सभी विद्यालयों में तुरंत पढ़ाई शुरू नहीं होगी, क्योंकि इसके लिए कई प्रशासनिक और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। केंद्रीय विद्यालय अपनी बेहतर शिक्षा व्यवस्था, कम फीस, अनुभवी शिक्षकों और पूरे देश में समान पाठ्यक्रम के कारण विद्यार्थियों की पहली पसंद माने जाते हैं।

अब तक कई जिलों के छात्रों को दाखिले के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन नए विद्यालय खुलने से यह परेशानी काफी हद तक दूर होगी।सरकारी जानकारी के अनुसार, 18 प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों में से 12 के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है, जबकि पांच जिलों में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है। वहीं एक जिले में जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। जमीन मिलने के बाद भवन निर्माण, आधारभूत संरचना, शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति जैसी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही नामांकन शुरू किया जाएगा।बिहार सरकार की कैबिनेट ने पूर्णिया पूर्व, राजगीर, शेखपुरा, मधेपुरा और मधुबनी में नए केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध कराने को मंजूरी दे दी है।

इसके अलावा नवादा, शेखोपुरसराय, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद तथा बक्सर समेत कई जिलों में भी जमीन चिह्नित कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। देशभर में वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय संगठन के 1,289 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें बिहार में 51 केंद्रीय विद्यालय पहले से कार्यरत हैं। पिछले एक दशक में बिहार में पांच नए केंद्रीय विद्यालय शुरू किए जा चुके हैं और अब 18 नए विद्यालयों की मंजूरी से राज्य के शिक्षा ढांचे को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि भूमि हस्तांतरण, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य औपचारिकताएं जल्द पूरी कर केंद्रीय विद्यालय संगठन को भूमि सौंप दी जाए, ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो। इन नए विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, खेल सुविधाएं और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन विद्यालयों के शुरू होने से छात्रों को अपने ही जिले में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिलेगी और उच्च गुणवत्ता वाली पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता भी कम होगी।


















