नालंदा, 18 जून (अविनाश पांडेय) नालंदा जिले में मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी विद्यालयों और अवैध कोचिंग संस्थानों की अब खैर नहीं है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने 1 जुलाई से 30 जुलाई तक जिलेभर में विशेष जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के दौरान निजी विद्यालयों की सघन जांच होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) मो. शाहनवाज ने बताया कि निदेशालय से प्राप्त निर्देशों के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जल्द ही एक उच्चस्तरीय जांच दल का गठन किया जाएगा, जिसमें वरीय अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।

जांच टीम विद्यालयों में बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली (आरटीई) और शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच करेगी। अभियान के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के अधिकारों की भी पड़ताल होगी। यह देखा जाएगा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों से किसी प्रकार का शिक्षण शुल्क या अन्य मदों में अवैध वसूली तो नहीं की जा रही है।जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 800 पंजीकृत निजी विद्यालय हैं, जबकि वास्तविक संख्या 2,000 से अधिक बताई जा रही है। बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां खेल मैदान, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, शौचालय और अग्निशमन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

कई विद्यालय मात्र दो-तीन कमरों में संचालित किए जा रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कुछ बड़े खुलासे भी हो सकते हैं। आरोप है कि कई गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों का मान्यता प्राप्त स्कूलों के साथ गठजोड़ है। छात्र पढ़ाई कहीं और करते हैं, जबकि परीक्षा के समय दूसरे विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) उपलब्ध कराकर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विशेष अभियान के तहत फर्जी और गैर-मानक विद्यालयों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिना पंजीकरण और नियमों के विपरीत चल रहे कोचिंग संस्थानों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। इस अभियान से जिले की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।


















