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दूधिया मालदा का बढ़ता जलवा गंगा किनारे का यह आम बना बिहार की शान, संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा प्लान

पटना, 21 अप्रैल (पटना डेस्क) बिहार की धरती पर उगने वाला दीघा का ‘दूधिया मालदा’ आम अब सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि राज्य की पहचान बनता जा रहा है। गंगा किनारे की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु में तैयार यह खास आम अपने अनोखे स्वाद, खुशबू और मिठास के कारण देशभर में लोकप्रिय हो रहा है। इसकी बढ़ती मांग ने इसे बिहार की कृषि विरासत का अहम हिस्सा बना दिया है। इसी विरासत को सहेजने और वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से उद्यान निदेशालय बिहार द्वारा एक अहम बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता निदेशक अभिषेक कुमार ने की, जिसमें विशेषज्ञों, किसानों और अधिकारियों ने मिलकर इस खास आम के संरक्षण और संवर्धन पर गहन चर्चा की।बैठक में विजय प्रकाश, बिहार विद्यापीठ और डॉ. एस. एन. दास समेत कई विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक किस्मों को संरक्षित रखने के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गंगा किनारे की ठंडी हवाएं और मिट्टी की खासियत इस आम को अलग पहचान देती है।

पारंपरिक खेती के तरीके इसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाते हैं, जिससे यह आम बाजार में खास स्थान बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और मजबूत विपणन रणनीति अपनाई जाए, तो ‘दूधिया मालदा’ आम को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाई जा सकती है। इससे किसानों की आय में भी बड़ा इजाफा होगा।

बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि इस खास आम की विरासत को सुरक्षित रखते हुए किसानों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि दीघा का ‘दूधिया मालदा’ आम आने वाले समय में बिहार की कृषि पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

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