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छोटे शहर का बड़ा कमाल: डुमरांव के अक्षत ने NEET में लहराया परचम, ऑल इंडिया रैंक 12,833 हासिल कर बढ़ाया बक्सर का मान

बक्सर, 17 जुलाई (विक्रांत) सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाले डुमरांव के 19 वर्षीय अक्षत कुमार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में शानदार सफलता हासिल कर पूरे बक्सर जिले का नाम रोशन कर दिया है। अक्षत ने ऑल इंडिया रैंक 12,833 प्राप्त की है, जबकि ओबीसी वर्ग में 5,888वीं रैंक हासिल की। उनका 99.3486 पर्सेंटाइल और फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण की मिसाल बन गया है। अक्षत की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े शहर या महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया।

उन्होंने डुमरांव में रहकर ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की और यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। अक्षत के पिता सुरेन्द्र मेहरा मठिला के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि माता कुमारी अंजू गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाले अक्षत अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और अनुशासित दिनचर्या को देते हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा डुमरांव के कैम्ब्रिज स्कूल में हुई और दसवीं तथा बारहवीं की पढ़ाई भी उन्होंने यहीं से पूरी की। अक्षत बताते हैं कि डुमरांव के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. राजेश सिंह की सेवा भावना और मरीजों के प्रति समर्पण ने उन्हें डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी।

यही प्रेरणा उनके जीवन का लक्ष्य बन गई। उनका सपना केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसा अस्पताल स्थापित करना है, जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्यूनतम खर्च पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। परिवार में एक भाई और एक बहन के साथ पले-बढ़े अक्षत की बहन वर्तमान में बीएड की पढ़ाई कर रही हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर माता-पिता और पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी मां का कहना है कि बेटे की वर्षों की मेहनत आज रंग लाई है।

अक्षत कुमार की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। डुमरांव के इस होनहार छात्र ने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, आत्मविश्वास मजबूत हो और मेहनत निरंतर हो, तो छोटे शहर से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।

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