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गंगा किनारे बसी पक्षियों की अनोखी दुनिया: हजारों घोंसलों पर मंडरा रहा खतरा, अब संरक्षण के लिए आगे आएंगे युवा किसान

बक्सर, 07 जुलाई (विक्रांत) गंगा के रेतीले तट इन दिनों दुर्लभ और देशी पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुलजार हैं। बक्सर से भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड तक लगभग 55 किलोमीटर लंबे रेतीले क्षेत्र में हजारों पक्षियों ने अपना आशियाना बनाया है। लेकिन इन घोंसलों और अंडों पर मानव गतिविधियों, पशुओं की आवाजाही और जंगली जानवरों के कारण लगातार खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए वन विभाग ने पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। गवर्निंग काउंसिल मेंबर ऑफ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) एवं पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा ने बताया कि दक्षिण बिहार में गंगा का यह रेतीला इलाका कई दुर्लभ पक्षियों के प्रजनन का प्रमुख केंद्र है।

अप्रैल से शुरू होने वाले प्रजनन काल में पक्षी रेत के भीतर घोंसले बनाकर अंडे देते हैं। कई बार मवेशियों के खुरों से ये घोंसले नष्ट हो जाते हैं, जबकि जंगली जानवर अंडों और बच्चों का शिकार कर लेते हैं।वन विभाग अब स्थानीय युवा किसानों को प्रशिक्षण देकर इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा में भागीदार बनाएगा। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को पक्षियों के घोंसलों की पहचान, उनकी निगरानी और संरक्षण के वैज्ञानिक तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही उन्हें चरवाहों और ग्रामीणों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी, ताकि प्रजनन स्थलों को नुकसान से बचाया जा सके। वन विभाग के रेंजर कन्हैया कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में रीवर टर्न, स्मॉल प्राटिनकोल और इंडियन स्कीमर जैसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

खुले रेतीले तट इन पक्षियों के लिए सबसे सुरक्षित प्रजनन स्थल हैं, लेकिन बढ़ती मानवीय गतिविधियां इनके अस्तित्व के लिए चुनौती बन रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के फ्रंटलाइन कर्मियों, गंगा प्रहरियों, डॉल्फिन मित्रों और स्थानीय युवाओं को शामिल किया जाएगा। जिले के 44 युवाओं को 30 से 40 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से गंगा की जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और इन दुर्लभ पक्षियों की नई पीढ़ी को संरक्षण मिल सकेगा।

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