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गर्म तवे पर बैठाकर दी गई थी यातनाएं, फिर भी नहीं डिगा विश्वास, श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया गया गुरु अर्जन देव का 420वां शहीदी दिवस

नालंदा, 20 जून (अविनाश पांडेय) सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस पर बिहारशरीफ शहर के मंगल कुआं स्थित गुरुद्वारा में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संगत और स्थानीय नागरिक गुरुद्वारा पहुंचे तथा गुरु साहिब को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।शहीदी दिवस के अवसर पर तड़के सुबह पांच बजे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का विधिवत प्रकाश किया गया। इसके बाद पंचवाणी एवं सुखमणि साहिब का पाठ हुआ। मुख्य ग्रंथी भाई रवि सिंह द्वारा प्रस्तुत मधुर शबद-कीर्तन से पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

संगत ने गुरबाणी का श्रवण कर सत्य, सेवा, त्याग और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश ग्रहण किया। इस अवसर पर ग्रंथी रवि सिंह ने गुरु अर्जन देव जी के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने धर्म, मानवता और सच्चाई की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने बताया कि मुगल शासक जहांगीर के शासनकाल में गुरु साहिब को अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें गर्म तवे पर बैठाया गया, खौलते पानी और गर्म रेत से प्रताड़ित किया गया, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था को कभी नहीं छोड़ा। कठिन परिस्थितियों में भी गुरु साहिब ने “तेरा कीआ मीठा लागै, हरि नामु पदारथु नानकु मांगै” कहकर प्रभु की इच्छा को स्वीकार किया।

कार्यक्रम के समापन पर अरदास और हुकमनामा का पाठ किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए गुरुद्वारा परिसर एवं मुख्य मार्ग पर ठंडे-मीठे जल की छबील लगाई गई, जहां श्रद्धालुओं और राहगीरों को शीतल जल पिलाया गया। साथ ही कड़ाह प्रसाद और चने का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर सरदार बीर सिंह, सरदार सतनाम सिंह, सरदार दीप सिंह सहित सिख समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने गुरु अर्जन देव जी के सेवा, त्याग, सहिष्णुता और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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