पटना, 13, अक्टूबर (पटना डेस्क) कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाली अलौली की कृष्णा देवी ने अपनी मेहनत, हुनर और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज पूरे इलाके की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। आर्थिक तंगी से जूझने वाली कृष्णा अब न सिर्फ परिवार को खुशहाल बना रही हैं, बल्कि अपनी थैला फैक्ट्री के जरिए डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। अत्यंत गरीब परिवार से आने वाली कृष्णा के पति दिल्ली में मजदूरी करते थे। कोरोना काल में रोजगार छूटने के बाद वे गांव लौट आए।

वर्ष 2021-22 में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कृष्णा ने अलौली के श्वेता जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत शुरू की और सिलाई-कटाई समेत रोजगारपरक प्रशिक्षण लिया। उनकी कार्ययोजना और आत्मविश्वास को देखते हुए समूह ने उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण दिया। अपनी बचत और ऋण राशि से उन्होंने गांव में थैला निर्माण का काम शुरू किया। दिल्ली की थैला कंपनी में काम कर चुके पति के अनुभव का भी उन्हें भरपूर लाभ मिला। उन्होंने थैला सिलने और उस पर दुकानों के नाम-पते की प्रिंटिंग के लिए मशीनें लगाई।

शुरुआत में कारोबार धीमा रहा, लेकिन गुणवत्ता, मजबूत सिलाई और आकर्षक प्रिंटिंग ने ग्राहकों का भरोसा जीत लिया। खगड़िया के अलावा पड़ोसी जिलों से भी लगातार ऑर्डर मिलने लगे। आज फैक्ट्री में आधा दर्जन से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि बिक्री व मार्केटिंग से एक दर्जन से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। कृष्णा की वार्षिक आय पांच लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। उनके सफर से प्रेरित होकर समूह की दो दर्जन से अधिक महिलाएं भी लघु उद्यम शुरू कर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रही हैं।


















