नालंदा, 05 जून (अविनाश पांडेय) कृषि भूमि की घटती उर्वरता, बढ़ते रासायनिक उपयोग और बदलते जलवायु संकट के बीच नालंदा जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया गया है। किसानों को जागरूक करने और कृषि भूमि के संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से जिला कृषि कार्यालय में जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने साफ कहा कि यदि समय रहते मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। बैठक की अध्यक्षता जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, हरनौत की वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान डॉ. सीमा कुमारी, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान उमेश नारायण उमेश, उप निदेशक (कृषि अभियंत्रण) अभिमन्यु कुमार, सहायक निदेशक (शस्य) भूमि संरक्षण भुदेव राणा समेत कई कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। साथ ही कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, प्रगतिशील किसान, खाद विक्रेता और विभिन्न उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी निभाई।अपने संबोधन में डॉ. नितेश कुमार ने कहा कि कृषि भूमि, मृदा स्वास्थ्य और जल संसाधनों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि खेत बचाओ अभियान के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीक, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन क्षमता घटने का खतरा बढ़ रहा है।किसानों को मृदा जांच, फसल चक्र, हरी खाद, जैविक खाद निर्माण, सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग और वर्षा जल संरक्षण की तकनीकों से भी अवगत कराया गया। बैठक में कृषि कर्मियों को निर्देश दिया गया कि वे गांव-गांव किसान चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अभियान को खेती और पर्यावरण दोनों के लिए जरूरी बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि मिट्टी और खेतों की सुरक्षा ही कृषि के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।


















