बक्सर, 03 जून (विक्रांत) कृषि उत्पादन में लगातार बढ़ती चुनौतियों और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति को देखते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन और कृषि अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास के नेतृत्व में “खेत बचाओ अभियान-2026” का शुभारंभ किया गया। यह विशेष अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा।अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाना है।

अपने संदेश में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मिट्टी कृषि की आधारशिला है और इसकी उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा मृदा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की अपील की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास ने कहा कि खेतों की उत्पादकता बनाए रखने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों को “कम खाद, सही खाद, सही सलाह” के मंत्र को अपनाने की सलाह देते हुए फसल अवशेषों को जलाने से बचने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में किसान प्रशिक्षण शिविर, मृदा परीक्षण अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और वैज्ञानिक परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. एन. सिंह ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत कम होगी और भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता सुरक्षित रहेगी। कार्यक्रम में जोन-III बी के लगभग 150 किसानों ने भाग लिया और मिट्टी जांच, जैविक एवं हरी खाद, प्राकृतिक खेती तथा पर्यावरण संरक्षण के उपायों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर डॉ. शोभा रानी, डॉ. मुनेश्वर प्रसाद, राजीव कुमार तथा ई. के. एस. रमन सहित कई विशेषज्ञों ने किसानों को टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रभात कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संगीता कुमारी ने किया। अंत में किसानों से मिट्टी बचाने और समृद्ध कृषि के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई।














