बक्सर, 22 जुलाई (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने कृषि अनुसंधान और मृदा संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम (NSMP) 1:10,000 स्केल के तहत QField आधारित डिजिटल फील्ड सर्वेक्षण संचालन पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। 21 और 22 जुलाई को विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग स्थित रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस प्रयोगशाला में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से मृदा सर्वेक्षण को अधिक सटीक, तेज और वैज्ञानिक बनाना रहा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के मार्गदर्शन और अनुमोदन में आयोजित किया गया।

कुलपति ने कहा कि कृषि अनुसंधान में आधुनिक जियोस्पेशियल तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता है और इससे मृदा संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन के साथ किसानों तक बेहतर तकनीकी समाधान पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय में डिजिटल तकनीकों के अधिकाधिक उपयोग पर बल देते हुए अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का संचालन मृदा विज्ञान विभाग के विश्वविद्यालय प्राध्यापक एवं राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के प्रधान अन्वेषक डॉ. अंशुमान कोहली के पर्यवेक्षण में किया गया। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. इंगले सागर नाडूलाल, डॉ. चंद्रभान पटेल, डॉ. भवानी प्रसाद मंडल, डॉ. विमल कुमार तथा अन्य परियोजना कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकनीकी सत्रों का संचालन अनुसंधान सहयोगी एवं संसाधन विशेषज्ञ डॉ. अंजनी कुमार ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को QField नामक मुक्त स्रोत मोबाइल जीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल डेटा संग्रहण, जीपीएस आधारित फील्ड लोकेशन, भू-संदर्भित मृदा अवलोकन, स्थानिक एवं गुणात्मक डेटा संपादन, फील्ड फोटोग्राफी, डिजिटल अभिलेख तैयार करने तथा डेटा सिंक्रोनाइजेशन की आधुनिक तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण में राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम से जुड़े यंग प्रोफेशनल (YP-I एवं YP-II) ने QGIS परियोजनाओं को मोबाइल प्लेटफॉर्म के अनुरूप तैयार करने से लेकर वास्तविक फील्ड सर्वेक्षण में QField के प्रभावी उपयोग तक की बारीकियां सीखीं। व्यावहारिक प्रदर्शन और संवादात्मक सत्रों ने प्रतिभागियों का आत्मविश्वास बढ़ाया तथा उन्हें आधुनिक डिजिटल सर्वेक्षण प्रणाली की उपयोगिता से अवगत कराया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से परियोजना कर्मियों की तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे मृदा सर्वेक्षण कार्यों की सटीकता, गुणवत्ता और मानकीकरण को नई मजबूती मिलेगी। समापन अवसर पर आयोजित फीडबैक सत्र में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उनके दैनिक फील्ड कार्य अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनेंगे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भू-स्थानिक तकनीकों के व्यापक उपयोग से राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम को नई गति मिलेगी और भविष्य में किसानों तथा कृषि नीति निर्माण के लिए अधिक विश्वसनीय मृदा डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा।














