पटना, 23 जुलाई (पटना डेस्क) बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के सरकारी दावों की हकीकत मंगलवार को रामगढ़ चौक प्रखंड की तेतरहाट पंचायत में सामने आ गई। पत्रकारों की एक टीम ने सुबह 10 बजे से 11 बजे तक तीन आंगनबाड़ी केंद्रों का ऑन-द-स्पॉट निरीक्षण किया, जिसमें बदहाल व्यवस्था, कम उपस्थिति, वर्षों से खाली पड़े सहायिका के पद और निजी मकानों में संचालित केंद्रों की तस्वीर सामने आई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इन केंद्रों के पास अपना भवन तक नहीं है।सबसे पहले वार्ड संख्या छह स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-54 का निरीक्षण किया गया। यहां 35 नामांकित बच्चों के मुकाबले केवल 19 बच्चे उपस्थित मिले। अधिकांश बच्चे निर्धारित ड्रेस में नहीं थे।

केंद्र की सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि भवन नहीं होने के कारण किराए के मकान में केंद्र चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले सहायिका सेवानिवृत्त हो गई थीं, लेकिन आज तक नई नियुक्ति नहीं हुई, जिससे केंद्र संचालन में भारी परेशानी हो रही है।इसके बाद वार्ड संख्या नौ स्थित केंद्र संख्या-57 की स्थिति और भी चिंताजनक मिली। यहां 35 नामांकित बच्चों में केवल सात बच्चे मौजूद थे। सेविका कल्पना कुमारी और सहायिका राधा देवी केंद्र पर मौजूद थीं, लेकिन बच्चों की बेहद कम उपस्थिति ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए।सुबह 11 बजे वार्ड संख्या 10 स्थित केंद्र संख्या-56 में भी लगभग यही हाल मिला। यहां भी 35 नामांकित बच्चों के विरुद्ध केवल सात बच्चे उपस्थित थे।

सेविका वीणा कुमारी ने बताया कि आठ वर्ष पहले सहायिका का निधन हो गया था, लेकिन आज तक रिक्त पद नहीं भरा गया। वह अकेले ही पूरे केंद्र का संचालन कर रही हैं। भवन नहीं होने के कारण बच्चों को निजी मकान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। केंद्रों के बाहर जलजमाव और अंदर संसाधनों की कमी भी साफ दिखाई दी। ग्रामीणों का आरोप है कि पोषण आहार के नाम पर कभी बिस्किट, कभी चॉकलेट तो कभी फल देकर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। उनका कहना है कि बच्चों के समुचित मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि मुख्य सड़क और बाजार के किनारे स्थित इन केंद्रों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान आखिर क्यों नहीं हो सका। उन्होंने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से तत्काल भवन निर्माण, रिक्त सहायिका पदों पर नियुक्ति तथा नियमित निरीक्षण की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कुपोषण मुक्त समाज और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा का सपना केवल सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।













