नई दिल्ली, 05 अप्रैल (अशोक “अश्क”) अप्रैल की शुरुआत जहां आमतौर पर भीषण गर्मी का संकेत देती है, वहीं इस बार मौसम ने चौंकाने वाला और खतरनाक मोड़ ले लिया है। लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों ने गर्मी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और अब हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यह अस्थिरता अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि आने वाले दिनों में इसका असर और व्यापक हो सकता है। शनिवार को दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में दिन में ही अंधेरा छा गया। काले बादलों के घने घेरे, तेज आंधी, मूसलधार बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। इस बेमौसमी बदलाव से तापमान में 4 से 5 डिग्री की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन विशेषज्ञ इसे अस्थायी राहत मान रहे हैं।

करीब एक हजार किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैले बादलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्यसागर से आने वाली ठंडी और नमी से भरी हवाएं पश्चिमी विक्षोभ के रूप में भारत पहुंचती हैं, जो इस असामान्य मौसम का मुख्य कारण हैं। इनके चलते अचानक मौसम बदलता है, काले बादल छाते हैं, तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अब यह खतरनाक सिस्टम उत्तर भारत से खिसककर मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। रविवार को झांसी, ग्वालियर और उत्तर मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई है। हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ उखड़ने, बिजली व्यवस्था ठप होने और कच्चे ढांचे गिरने का खतरा है। सबसे ज्यादा चिंता किसानों के लिए है। ओलावृष्टि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। राजस्थान और हरियाणा में पहले ही तबाही देखी जा चुकी है, और अब मध्य प्रदेश व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान खतरे की जद में हैं।
















