नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अशोक “अश्क”) एशिया की भू-राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में ‘सेनलिंग’ नाम की नई काउंटी के गठन की घोषणा कर दी। यह काउंटी पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर और अफगानिस्तान की सीमा के बेहद करीब स्थित है, जिससे भारत समेत पूरे क्षेत्र का ध्यान इस पर केंद्रित हो गया है।

26 मार्च को घोषित इस नई काउंटी का स्थान काराकोरम पर्वतमाला के पास है और यह संवेदनशील वाखान कॉरिडोर से सटी हुई है। यह वही 74 किलोमीटर लंबी पट्टी है, जो ताजिकिस्तान को पीओके से अलग करती है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह कदम सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। खासतौर पर ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के उइगर उग्रवादियों की संभावित घुसपैठ को रोकना इसका प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है। बीजिंग को लंबे समय से आशंका रही है कि ये उग्रवादी अफगानिस्तान के रास्ते वाखान कॉरिडोर के जरिए शिनजियांग में प्रवेश कर सकते हैं।

यह नई काउंटी काशगर प्रीफेक्चर के प्रशासन के तहत आएगी। काशगर प्राचीन सिल्क रोड पर स्थित एक अहम शहर है और चीन को दक्षिण व मध्य एशिया से जोड़ने वाला प्रमुख द्वार माना जाता है। यही क्षेत्र 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है, जिसका भारत लगातार विरोध करता रहा है।गौरतलब है कि यह बीते एक साल में शिनजियांग में बनी तीसरी नई काउंटी है। इससे पहले चीन द्वारा बनाए गए कुछ क्षेत्रों पर भारत ने आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे अक्साई चिन जैसे विवादित इलाकों से जुड़े हैं, जिस पर 1962 के युद्ध के बाद चीन का कब्जा है। विश्लेषकों का मानना है कि ‘सेनलिंग’ का गठन चीन की सीमावर्ती इलाकों पर पकड़ मजबूत करने और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की नीति का हिस्सा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

















