पटना, 15 अक्टूबर (पटना डेस्क) आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा की दिशा में भागलपुर और बांका अब बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में हैं। सूरज की भरपूर रोशनी को बिजली में बदलने की मुहिम से न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी घटेगी। भागलपुर के खरीक में पांच करोड़ रुपये की लागत से 2.4 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा जिले में सात-आठ अन्य सौर ऊर्जा इकाइयां प्रस्तावित हैं।खरीक में सरकार खरीदेगी बिजलीपीएम-कुसुम की ‘सी’ योजना के तहत स्थापित हो रही इस परियोजना में निजी कंपनी करीब पांच करोड़ रुपये निवेश कर रही है।

केंद्र से करीब 1.05 करोड़ और राज्य सरकार से 45 लाख रुपये अनुदान का प्रावधान है। उत्पादित बिजली को सरकार तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी। 2400 किलोवाट क्षमता वाले प्लांट से मानक के अनुसार प्रतिमाह करीब 2.88 लाख यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। बांका में पहले से चल रहे चार बड़े प्लांटबांका में 85 मेगावाट क्षमता के चार सोलर प्लांट संचालित हैं। शंभुगंज में 5, ककवारा में 25, कटोरिया में 50 और बौंसी में 5 मेगावाट की इकाइयां बिजली उत्पादन कर रही हैं। स्थानीय उत्पादन शुरू होने से लो वोल्टेज और वोल्टेज उतार-चढ़ाव की समस्या लगभग खत्म होने की बात कही गई है।

रूफटॉप सोलर में भागलपुर चौथे नंबर परघरेलू सौर ऊर्जा अपनाने में भागलपुर ने बिहार में चौथा स्थान हासिल किया है। जिले में 1470 घरों की छतों पर सोलर पैनल लग चुके हैं। पटना 11,981 घरों के साथ पहले, मुजफ्फरपुर 2,583 के साथ दूसरे और नालंदा 1,913 घरों के साथ तीसरे स्थान पर है।















