पटना, 07 अक्टूबर (पटना डेस्क) बिहार के सुपौल जिले में प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा अंतर बुधवार को राघोपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित टीसीपी भवन में आयोजित सेवा सेतु शिविर में सामने आया। आम लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित शिविर में अव्यवस्था का ऐसा आलम दिखा कि ग्रामीणों को अपेक्षित सुविधाएं मिलना तो दूर, कई विभागों की मौजूदगी तक स्पष्ट नहीं हो सकी। प्रखंड कार्यालय की ओर से दावा किया गया था कि शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित 14 अलग-अलग काउंटर लगाए जाएंगे।

इन काउंटरों के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ आवेदन और संबंधित समस्याओं के समाधान की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन शिविर स्थल का निरीक्षण करने पर तस्वीर दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आई।मौके पर केवल जीविका विभाग का बोर्ड दिखाई दिया। अन्य विभागों के काउंटरों पर न तो स्पष्ट पहचान थी और न ही संबंधित योजनाओं अथवा विभागों की जानकारी उपलब्ध थी। काउंटरों की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो शिविर के आयोजन की औपचारिकता ही पूरी की गई हो। व्यवस्था के अभाव में शिविर परिसर लगभग सुनसान नजर आया और ग्रामीणों की मौजूदगी भी बेहद कम रही।

सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए आयोजित शिविर में ही जब विभागीय व्यवस्था नदारद दिखी तो प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि काउंटर और संबंधित कर्मचारी ही मौजूद नहीं होंगे तो आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा।स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कराने और भविष्य में ऐसे शिविरों में सभी विभागों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।













