बक्सर, 29 सितम्बर (विक्रांत) डुमरांव प्रखंड के मठिला गांव की माधुरी देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने हुनर को आय का जरिया बनाया और आज सिलाई के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 रुपये तक कमा रही हैं। माधुरी देवी के परिवार में पति, एक पुत्र और एक पुत्री समेत चार सदस्य हैं। उनके पति खेती-बाड़ी करते हैं, लेकिन खेती से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं थी। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यकताओं के कारण परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

माधुरी देवी को पहले से सिलाई का हुनर आता था और वह इससे परिवार की आमदनी बढ़ाना चाहती थीं। हालांकि, सिलाई मशीन खरीदने के लिए पूंजी नहीं होने के कारण उनका हुनर घर तक ही सीमित था। कुछ महिलाओं की सलाह पर वह जीविका से जुड़ीं और पार्वती स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य बनीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और प्रत्येक सप्ताह 10 रुपये जमा करने लगीं। इससे उनमें वित्तीय अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित हुआ।इसके बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत उन्हें 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। माधुरी देवी ने इस राशि का उपयोग सिलाई मशीन खरीदने में किया।

मशीन मिलने के बाद उन्होंने अपने हुनर को व्यवस्थित रूप से आजीविका में बदल लिया।अब वह आसपास के लोगों के कपड़े सिलकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। उनके लिए सिलाई मशीन महज साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई राह साबित हुई है। उनकी सफलता बताती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाओं का हुनर परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।

















