बक्सर, 02 सितम्बर (विक्रांत) सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करने वाली डुमरांव प्रखंड के नया भोजपुर गांव की चम्पा देवी आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। कभी पति के साथ खेतिहर मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाने वाली चम्पा देवी ने महज 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के दम पर पशुपालन को आय का मजबूत जरिया बना लिया। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की प्रेरणादायक कहानी बन गई है। चम्पा देवी के परिवार में पति-पत्नी और तीन बेटियां हैं। जीविका से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पति-पत्नी दोनों दूसरे के खेतों में मजदूरी करते थे। काम मिलने पर ही आमदनी होती थी। अनिश्चित आय के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती थी।

ऐसे में तीन बेटियों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य को लेकर चम्पा देवी लगातार चिंतित रहती थीं।इसी बीच वह जीविका से जुड़ीं और शिव स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सामूहिक सहयोग के साथ आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला। धीरे-धीरे उनमें आत्मनिर्भर बनने का विश्वास पैदा हुआ।मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चम्पा देवी को प्रथम किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने इस राशि को अपनी बचत के साथ मिलाकर एक गाय खरीद ली। इसके बाद पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आजीविका का साधन बनाया।वर्तमान में उनकी गाय प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध देती है। चम्पा देवी दूध डेयरी में बेचकर नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।

इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और भविष्य को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ा है।चम्पा देवी की कहानी बताती है कि सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मेहनत मिले तो ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं, बल्कि पूरे परिवार की तस्वीर बदल सकती हैं। 10 हजार रुपये से शुरू हुई उनकी पहल आज परिवार के लिए नियमित आय का आधार बन चुकी है।
















