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हिरासत में मौत पर गरमाई सियासत: मधुबनी पहुंचे प्रशांत किशोर, बोले– 10 दिन में इंसाफ दें, तेलंगाना में मासूम से दुष्कर्म ने झकझोरा

पटना, 16 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार के मधुबनी में पुलिस हिरासत में रोशन यादव की मौत का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में विधायक बने जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने मधुबनी पहुंचकर वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मुलाकात की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन ने 10 दिनों के भीतर न्याय सुनिश्चित नहीं किया तो जन सुराज पार्टी इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन करेगी। प्रशांत किशोर ने बताया कि मृतक रोशन यादव के परिजनों का आरोप है कि 27 मई को रहिका थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन गिरफ्तारी की कोई लिखित सूचना या नोटिस परिवार को नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि पुलिस की पिटाई से रोशन की मौत हुई, जबकि पुलिस, प्रशासन और जेल अधिकारियों का दावा है कि उसने आत्महत्या की थी।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार रोशन यादव का कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से जांच होना बेहद जरूरी है। प्रशांत किशोर के अनुसार, एसएसपी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच जिलाधिकारी की निगरानी में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराई जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट दो से तीन दिनों में आने की संभावना है, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।उधर, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से भी मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। पुलिस ने मंदिर के 66 वर्षीय प्रबंधक को एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के आरोप में हिरासत में लिया है।

पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त को मंदिर परिसर के भीतर वारदात को अंजाम दिया गया। स्थानीय लोगों ने आरोपी को कथित रूप से रंगे हाथों पकड़ लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी।रामचंद्रपुरम पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की गहन जांच जारी है। एक ओर बिहार में पुलिस हिरासत में मौत को लेकर जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर हैदराबाद की घटना ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। दोनों मामलों में लोगों की निगाहें अब निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय पर टिकी हैं।

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