समस्तीपुर, 02 अगस्त (हर्षिता “अश्क”) वन्य जीवों पर क्रूरता और अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन की सख्ती के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नौनिहालों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए संचालित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-248 के कमरे में सांपों को कैद कर रखने का खुलासा होने पर शनिवार को प्रशासनिक टीम ने गंगौली स्थित सामुदायिक भवन में छापेमारी की। हालांकि यह महज संयोग रहा कि कार्रवाई की भनक पहले ही केंद्र की सेविका को लग गई, जिसके बाद सपेरा भगत और उसके स्वजन कथित रूप से सांपों को पास के जंगल में छोड़कर फरार हो गए। अंचलाधिकारी चंद्रशेखर के नेतृत्व में पहुंची टीम ने केंद्र की जांच की। जांच के दौरान जानकारी मिली कि सांपों को लवनी और मिट्टी के घड़ों में बंद कर रखा गया था।

पूछताछ में आंगनबाड़ी सेविका ने अधिकारियों के समक्ष स्वीकार किया कि केंद्र के कमरे में सांप रखे गए थे, जिन्हें बाद में हटा दिया गया।मामले को गंभीर मानते हुए सीओ चंद्रशेखर ने संबंधित लोगों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में केंद्र या उसके आसपास सांपों को रखने अथवा प्रदर्शित करने की शिकायत मिली तो संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने मौके पर सपेरों के स्वजनों एवं ग्रामीणों से बंधपत्र भरवाकर हस्ताक्षर भी कराए। छापेमारी के दौरान केंद्र पहुंचे बच्चों के अभिभावकों और ग्रामीणों ने सेविका के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बच्चों के हितों की अनदेखी की गई है और केंद्र के संचालन में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।सीडीपीओ डॉ. सुनीता कुमारी ने कहा कि सामुदायिक भवन में संचालित इस केंद्र में गांव के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे स्थान पर सांपों का भंडारण पूरी तरह गैरकानूनी और बेहद खतरनाक है। उन्होंने बताया कि लाभुकों को मिलने वाली सुविधाओं में गड़बड़ी की शिकायत भी मिली है, जिसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी है और निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।


















