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मौत के मोड़ का होगा अंत: मुजफ्फरपुर के सदातपुर में बनेगा 50 करोड़ का अंडरपास, जाम और हादसों से मिलेगी बड़ी राहत

मुजफ्फरपुर, 15 जुलाई (संतोष गुप्ता) लंबे समय से भीषण जाम और लगातार हो रहे सड़क हादसों के लिए बदनाम कांटी प्रखंड के सदातपुर मोड़ (दिल्ली मोड़) की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से यहां आधुनिक अंडरपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसी महीने निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। विभाग ने एक वर्ष के भीतर परियोजना पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सदातपुर मोड़ को पहले ही ब्लैकस्पॉट घोषित किया जा चुका है। यहां लगातार सड़क दुर्घटनाएं होने और घंटों तक जाम लगने की समस्या से हजारों वाहन चालक और स्थानीय लोग परेशान थे। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में भी यह मुद्दा कई बार उठाया गया। शुरुआती स्तर पर ब्रेकर और डिवाइडर बनाए गए, लेकिन इससे न तो जाम की समस्या खत्म हुई और न ही हादसों पर प्रभावी नियंत्रण लग सका।

इसके बाद एनएचएआई ने स्थायी समाधान के रूप में अंडरपास निर्माण का फैसला लिया।परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर मुख्यालय भेजी गई थी। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अब निर्माण एजेंसी को काम सौंपने की तैयारी अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद निर्धारित समय सीमा में इसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। सदातपुर मोड़ पर चारों दिशाओं से वाहनों का भारी दबाव रहता है। चांदनी चौक, संगम घाट, मोतिहारी, दरभंगा, सीतामढ़ी और समस्तीपुर की ओर से आने-जाने वाले वाहनों के कारण यहां अक्सर लंबा जाम लग जाता है। कई बार इसका असर चांदनी चौक तक दिखाई देता है, जिससे आम लोगों और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।

एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, यह अंडरपास नवनिर्मित मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाइपास को ध्यान में रखकर भी बनाया जा रहा है। हाजीपुर की ओर से आने वाले वाहन सीधे मोतिहारी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ते हैं, जिससे यह चौराहा प्रमुख जंक्शन बन गया है। अंडरपास बनने के बाद ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा, वाहनों की आवाजाही सुचारु होगी और दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्षों पुरानी जाम और दुर्घटनाओं की समस्या से अब स्थायी राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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